#HumTum कहानी: खो गए!

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#HumTum कहानी: खो गए!

#HumTum में पहली कहानी है “खो गए!”

“सुनिए! आप वही हैं ना? फेसबुक पर हैशटैग से पोस्ट करने वाले?” उसने उतावलेपन से पूछा।
“जी, नहीं!” मैंने रूखेपन से जवाब दिया और टेबल पर पड़ी बोतलों, प्लेट्स को उठाकर डस्टबिन में फेंक दिया।
कुछ ही देर बाद, उसने मेरी तरफ इशारा करके मोबाइल में दोस्तों को कुछ दिखाया। उन्होंने हां में सर हिलाया और मुझे घूरने लगे। मैंने काउंटर से ऑर्डर रिसिप्ट उठाई और वापस किचेन में चला गया।

ये दुनिया भी कितनी छोटी है ना! कि 1000 मील दूर से भी कोई आपको अचानक से मिल जाए पता नहीं!
“वीना” को मेरी कविताएं बहुत पसंद थी, धीरे धीरे हम करीब आते गए, फिर फोन पर हमारी घंटों बातें होने लगी। 3 साल पहले मिलने के भी प्लांस बने, लेकिन अचानक से आए भूकंप में मेरा परिवार बिखर गया। परिवार में सिर्फ मै बदनसीब ही जिंदा था।

अपना शहर छोड़ मै यहां आ गया था और रेस्टोरेंट में काम करने लगा।  जब एक दिन मैसेज चेक किया तो “वीना” का आखिरी मेसेज था, “धोखेबाज हो तुम” और फिर कभी वापस फेसबुक नहीं खोला।
हां आखिरी बार उसकी कुछ तस्वीरें सेव कर ली थी, जिसे हर रात निहार लेता हूं और कुछ पंक्तियां सुना दिया करता हूं।

“स्वर! टेबल 5 का ऑर्डर हो गया” मैनेजर ने आवाज़ दी और मै सर झुकाए ऑर्डर उनके टेबल पर रख आया।
सब ख़ामोश थे, मैंने कनखियों से “वीना” की तरफ देखा वो भी मुझे ही देख रही थी, उसके आंखो में तैरते आंसू सवालों से भरे थे।

मै मुड़ा और वापिस किचेन में चला गया, उन्हीं सवालों के साथ जिसका जवाब सिर्फ अतीत के पास है।

#हमतुम
#humtum

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