ARJUN MEHAR ki dairy se

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दोस्तों मैं पिछले दस दिन से उत्तर भारत में जितने भी “रेड लाइट एरियाज” है उनके भ्रमण पर था क्योंकि मैं सेक्स वर्कर्स की लाइफ पर एक नोवेल लिख रहा हूँ। पिछले दस दिनों में उत्तरप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के रेड लाइट एरियाज में गया और वहाँ जिस्म फिरोशी का धन्धा करने वाली महिलाओं से उनकी कहानियाँ सुनी तो मेरे जिस्म की एक-एक रूह काँप उठी। मैंने उन दस दिनों में जो भी जानकारियां जुटाई, उसे मैं एक संक्षिप्त लेख के तौर पर प्रस्तुत कर रहा हूँ। लेख शुरू करने से पहले मैं चार पंक्तियाँ आपको सुनाना चाहता हूँ।

-: रोटी की कीमत :-

एक लड़की सड़क किनारे जिस्म का सौदा कर रही थी।
उस दिन मैंने जाना कितनी ताकत है एक रोटी में।।

रोटी कितनी महँगी है यह वो औरत बताएगी।
जिसने जिस्म गिरवी रख के यह क़ीमत चुकाई है।।

जिंदगी नरक की जीती है वो लडकियां कोठे पर।
लेकिन एक वक़्त की रोटी जिस्म गिरवी रखने पर मिलती है।।

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आज दुनिया जिस तेज़ी से विकास के पैमाने तय कर रही है, उसी तेज़ी से इंसान का चरित्र गिरता जा रहा है। आज के युग में जहां पैसा ही भगवान नज़र आ रहा है, उसे देखकर दुनिया का भविष्य अंधकारमय दिखाई देता है। आधुनिकता के इस युग में यूँ तो हर एक धन बटोरने की होड़ के चलते दूसरों का शोषण करने में प्रयासरत हैं,लेकिन आज के युग में भी सबसे अधिक शोषण का शिकार हमेशा से शोषित होती आयी नारी ही है। कहीं उन्हें सरेआम फैशन की दौड़ में लूटा जाता है तो कहीं देह व्यापार की अंधी गली में धकेल दिया जाता है। हद तो तब होती है, जब उनके अपने माता-पिता, चाचा-मामा, भाई जैसे सगे-संबंधी ही रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करते हुए महिलाओं को इस दलदल में फंसने पर मजबूर कर देते हैं। पूरे-पूरे खानदान और गांव के गांव देह व्यापार के धंधे में शामिल हो जाते हैं।

आज बेडिया, नट, सांसी और बांछड़ा समाज जैसी कई जनजातियों के उदहारण सबके सामने हैं। इन जाती समूहों में पैदा हुई लड़कियों को पारिवारिक देह व्यापार की अंधी गली में उम्र भर के लिए धकेल दिया जाता है जहाँ वह बिना विवाह किए परिवार का भरण-पोषण का ज़िम्मा संभालती हैं।

देह शोषण के इस धंधे का एक खतरनाक पहलु यह भी है कि अक्सर महिलाओं को जल्द से जल्द इस धंधे में झौंकने के चक्कर में अक्सर कम उम्र की लडकियों को “आक्सीटासिन” जैसी दवाइयों के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। जिससे उनके शरीर के हार्मोन बिगड़ जाते हैं और वह 11-12 साल की उम्र में ही देह व्यापार में उतार दी जाती हैं। “आक्सीटासिन” वह इंजेक्शन है जो भैंसो को अधिक तथा जल्दी दूध देने के लिए और सब्जियों एवं मूर्गियों को जल्दी खाने लायक बड़ा बनाने के लिए लगाए जाते हैं। शरीर के हार्मोन बिगड़ जाने के कारण यह इंजेक्शन अक्सर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं। आक्सीटासिन के प्रयोग से होरमोंस में गड़बड़ी करके लड़कियों की भावनाओं के साथ खतरनाक तरीके से खिलवाड़ किया जाता है, इसके कारण लड़कियों में कई प्रकार के हार्मोनल परिवर्तन होते हैं जैसे महावारी का जल्दी आना, इसके अलावा इसमें मुख्यत: प्यार, विश्वास तथा कामोत्तेजना के स्तर का बढ़ना जैसे भावनात्मक परिवर्तन शामिल हैं।

राजस्थान (भरतपुर,सवाईमाधोपुर,दौसा,उदयपुर और जयपुर), उत्तरप्रदेश (आगरा,सिकंदरा,अलीगढ और हाथरस), दिल्ली और हरियाणा में कई जगहों पर आक्सीटासिन इंजेक्शन को कोड नेम “गोली नंबर 10” के नाम से चुपचाप बेचा जाता है। जो कि शहर की सभी दवाइयों की दुकानों पर आसानी से उपलब्ध है।

अक्सर कम उम्र की लड़कियों को अगवा करके ऐसी जगहों पर ले जाया जाता है, जहाँ वह भरे-पूरे परिवार के साथ रहती हैं। छोटी उम्र की बच्चियों के बड़े होने का इंतज़ार किया जाता है जिससे कि उन्हें देह व्यापार में धकेला जा सके। कम उम्र से ही परिवार में पलने के कारण किसी लड़की को यह पता ही नहीं होता कि वह कहीं से अगवा करके लाई गई थीं और वह स्वयं को परिवार का ही हिस्सा समझती है। साथ ही साथ बचपन से ही उनके यह दिमाग में डाला जाता है कि यह बुरा कर्म नहीं बल्कि उनका पारिवारिक कार्य है। अगर कोई लड़की सेक्स करने से मना कर देती है तो कोठे की मालकिन द्वारा उसे बुरी तरह प्रताड़ित किया जाता है। कई दिनों तक खाना नहीं दिया जाता है और छोटी-छोटी कोठरियों में बंद कर के रखा जाता है।

जब मैं राजस्थान के भरतपुर, सवाईमाधोपुर और दौसा ज़िलों के उन गांवों में पहुंचा जहाँ देह व्यापार किया जाता है तो इन गांवो की गुमनाम अँधेरी गलियों का सच देखकर मेरे होश उड़ गए। मुझे हैवानगी का ऐसा घिनौना चेहरा भी सामने आया, जिसे सुन कर हैवानियत भी कांप उठे। उन गांवों के अधिकतर लोग अपनी स्वयं की बेटीयों के साथ-साथ अगवा करके दूर-दराज़ से लाई गई लड़कियों के द्वारा देह व्यापार का अंतर्राज्जीय और अंतर्राष्ट्रीय कारोबार चला रहे थे।

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