ARJUN MEHAR ki dairy se

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मैं रोजाना की तरह अपनी पसन्दीदा जगह पर गुमसुम बैठा था ना सिगरेट पीने का मन कर रहा था ना चाय। तभी राजेश अंकल की आवाज ने ख़ामोशी के वातावरण को भंग किया – “अरे अर्जुन, आज कहाँ खोये हुए हो? उदास भी लग रहे हो। पापा-मम्मी से झगड़ा हुआ है क्या?”

“नहीं राजेश अंकल ऐसी कोई बात नहीं है। बस एक बुरी ख़बर है। वो सुबह सुबह मनोहर अंकल की कार स्टार्ट नहीं हो रही थी तो उन्होंने उनकी बेटी “राधिका” की ब्लड रिपोर्ट्स लाने के लिए मुझे जयपुरिया अस्पताल भेजा था। मैंने जैसे ही रिपोर्ट ली और पढ़ी तो सदमा लग गया। उसकी जांच रिपोर्ट में एड्स कन्फर्म हो गया है। मैंने जैसे ही रिपोर्ट्स राधिका के घरवालों को दी और उन्होंने भी उसे पढ़ा तो उन सभी के चेहरों पर एक मासूमी छा गई। मैंने राधिका से बस इतना ही कहा कि तुम इस रिपोर्ट्स से टूट नहीं सकती हो। इसमें तुम्हारी गलती नहीं है जो होना था हो गया अब आगे के जीवन को खुल कर जीना है।”

“अरे..अर्जुन! तुम क्यों उदास हो रहे हो। मुझे तो उसके चाल-चलन पर पहले से ही शक था क्योंकि मनोहर जी ने राधिका को ज्यादा ही आजादी दे रखी है। मैंने अक्सर उसे लेट-नाईट पार्टियों से आते देखा है। सीधी सादी लड़कियां हमेशा सलवार-सूट में रहती है राधिका की तरह स्कर्ट में नहीं। और हाँ, क्या तुमने वो साँपों वाला टैटू देखा है उसकी कमर पर? क्या ये किसी शरीफ लड़की के लक्षण है? पता नहीं उस बेहया लड़की ने कितने लोगों के साथ यौन-सम्बन्ध बनाये होंगे। अब यह बात पूरी कॉलोनी को पता चलेगी तो मनोहर जी किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं रहेंगे। पता नहीं कितने लड़कों को और दी होगी उस चरित्रहीन लड़की ने ये……” 

वो पूरी बात खत्म करते उससे पहले ही मेरे सब्र का बाँध टूट गया और मैंने कहा- “राकेश अंकल, डॉक्टर ने तो मुझे ये बताया है कि राधिका को यह बीमारी इन्फेक्टेड ब्लड चढाने से हुई है और मुझे जहाँ तक याद है.…जब पिछली बार वह बीमार हुई थी तो शायद आपने ही उसे ब्लड दिया था।”

पहले तो चिंता में पड़ गए फिर संभलकर क्रोधित होते हुए बोले, “फालतू की बात मत करो अर्जुन। तुम उम्र में बहुत छोटे हो इसलिए बच्चा समझ कर माफ़ कर रहा हूँ।”

“राजेश अंकल, आप उम्र में बड़े हो इसलिए छोड़ रहा हूँ नहीं तो राधिका जैसी जिंदादिल लड़की के लिए एक लफ्ज भी नहीं सुनता। और आपने उस पर जितने भी इल्जाम लगाये है वो आपकी घटिया मानसिकता को प्रदर्शित करते है।”

तभी राजेश जी के पास फोन आया, “हेलो, राजेश जी बोल रहे है?”
“जी हां, कहिये।”
“देखिये आप तुरंत फोर्टिस हॉस्पिटल आ कर डॉ. मिश्रा से मिल लीजिये और हाँ वाइफ को भी लेकर आइयेगा।”

तभी राजेश अंकल शर्मिंदा हो कर वहाँ से चले गए और मैंने कैलाश जी से कहा-“कैलाश जी, यार एक माइल्ड और एक चाय दो। इस जिंदगी के कुछ ग़मों को धुएं के सहारे उड़ाना है।”

©लेखक:- अर्जुन महर

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