आज़ादी के आयाम: एक नज़र १९४७ से २०१८ तक

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    आज़ाद भारत के आयाम

    आज़ादी के 72 साल, 15 अगस्त 1947 से 2018 का सफ़र नये कीर्तिमान, नये आयाम और बुलंदियों को छूता भारत! कितना गौरवमयी है ना! भारत 72 वर्षों में एक विश्वशक्ति बनकर उभरा है| शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, सेवा, तकनीकी विज्ञान के क्षेत्र में हमने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है| मुकेश अम्बानी, रतन टाटा, अजीम प्रेम जी जैसे पूजीपतियों ने विश्व पटल पर भारत को पहचान दी है तो भारत के इंजिनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक विश्व में नाम कमा रहे हैं|
    independence day amit pandey blog

    आइये 1947 से 2018 तक के भारत के सफ़र पर नज़र डालते हैं-
    दशकों संघर्ष के बाद आख़िरकार अंग्रेज देश छोड़ने को तैयार हुए, हाँ जाते जाते एक दंश दे गए, बंटवारा! हालाँकि राजनीतिज्ञ आज भी कतराते हैं बंटवारे के साजिशकर्ता का नाम लेते हुए| बटवारा इतनी धूर्तता से हुआ था की कारखाना एक देश के पास तो कच्चा माल दूसरे के पास, नदी का उद्गम एक देश में तो बाँध दूसरे में| एक देश जो धर्म विशेष बना तो दूसरा सर्व धर्म समभाव भावना से प्रेरित रहा हालाँकि यहाँ ये भी आशय रहा रहा होगा की आज नहीं तो कल दूसरा देश साम्प्रदाय की आग में झुलसेगा! क्योकि किसी विशेष संप्रदाय की बहुलता हमेशा से दूसरे के लिए संकट होता है जैसा पाकिस्तान में देखते आये हैं और भारत में भी कुछ राज्यों में ये कहानी दोहराई गयी है|
    लेकिन इससे बड़ा सवाल ये है कि बटवारे से नुकसान किसका हुआ?
    राजनेताओ का? पूजीपतियों का? तथाकथित महान देशभक्तों का? राजघरानो का?
    मेरे हिसाब से नुकसान हुआ तो सिर्फ आम नागरिकों का, जिसने लहू भी बहाया और फिर जमीन भी गवाई| 55 लाख मुस्लिम भारत में ही रहना चुना जिनकी देशभक्ति पर आज भी सवाल उठते हैं| दशकों बाद भी धर्म के नाम पर खेला गया आज भी हो रहा है|
    freedom amit pandey

    कश्मीर नाम तो सुना होगा! महाराजा हरी सिंह और फिर शेख अब्दुल्ला के कश्मीर का जिन्न आज भी भारत और पडोसी मुल्क के रार का मुद्दा है|
    लोकतंत्र की स्थापना के बाद कांग्रेस को 70% जनता ने सर्वसम्मति से चुना, वही प्रधानमंत्री पद की दावेदारी में भी “रसूख” का असर दिखा जो आज भी राजनीती के गलियारे में परिवारवाद के नाम से जाना जाता है|   
    पंडित नेहरू और फिर शास्त्री जी की ताशकंद में हुयी संदिग्ध मौत से कांग्रेस को बहुत नुकसान हुआ और विपक्षी पार्टियाँ मजबूत हुयी|
    वहीं अपनी जमीन, जमीर के लिए आन्ध्र प्रदेश और दूसरे हिस्से में एक गुट उभरा, जिसे “नक्सल” के नाम से जानते हैं|
    आज़ादी के २५ सालों बाद भी देश बेरोज़गारी, गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य की बुनियादी जरुरत के लिए भी संघर्ष कर रहा था| देश में असंतोष था जिसका फायदा विपक्ष ने उठाया और यही से शुरू हुआ “फरेब” और “झूठे वादे” का राजनीतिक हथकंडा| जय प्रकाश के देश व्यापी आन्दोलन और कांग्रेस का विरोध देश को आपातकाल की भट्टी में झुलसने को मजबूर किया| हालाँकि “जनता पार्टी” को फायदा हुआ, आपातकाल के बाद सत्ता में आये लेकिन उसके बाद देश में दंगे की आग भड़की और “जनता पार्टी” सत्ता से बेदखल हो गयी|
    उसके बाद पंजाब में खालिस्तान की मांग उठने लगी, जो आगे चलकर इंदिरा गाँधी की हत्या के रूप खत्म हुयी | सिख दंगा हुआ, हजारों के खून बहे, लाशे बिछी |

    वही श्रीलंका के साथ अच्छे सम्बन्ध की कीमत राजीव गाँधी को मौत के रूप में चुकानी पड़ी | संजय, इंदिरा और फिर राजीव के बाद कांग्रेस का दौर खत्म होता प्रतीत हुआ | विपक्ष हावी हुआ |
    १९९० से भारत में सूचना और संचार ने कुचालें भरना शुरू की और आज जिओ डिजिटल भारत के मिशन को आगे ले जा रहा है|
    इसी दौरान जातिगत आरक्षण को सर्वसम्मति से अनिवार्य और मूलभूत सेवाओ में शामिल कर लिया गया| 1998 में पोखरण परीक्षण हुआ जो देश के लिए मील का पत्थर साबित हुआ हालाँकि वैश्विक प्रतिबन्ध भी झेलना पड़ा लेकिन वो सफलता के पैमाना पर कमतर था| भारत दूसरे देशों के लिए चुनौती भी बन कर उभरा| मुंबई बम ब्लास्ट और फिर बाबरी मस्जिद विन्ध्वंश ने देश को झकझोर कर रख दिया|

    हम चुनौतियों से लड़ते हुए आगे तो बढ़ते गए लेकिन 2000 से देश में राजनीतिक पतन का दौर शुरू हुआ| कांग्रेस परिवारवाद को तोड़कर वित्तीय मामलों के महारथी को सत्ता देती है लेकिन एक कठपुतली की तरह इस्तेमाल करती है जिसका फायदा “गोधरा” से लोगों की नज़र में आये “नरेन्द्र मोदी” को हुआ| हाँ, मोदी ने गुजरात की कायाकल्प की तो देश को एक आश दिखी और २०१४ के ऐतिहासिक फैसले ने जनता ने सदी के दूसरे शक्तिशाली व्यक्ति को प्रधानमंत्री के रूप में चुना|
    मौजूदा प्रधानमंत्री के कार्यकाल का अंतिम वर्ष है| २०१४ में लाल किले के प्राचीर से इतने वादे हुए थे की कुछ एक ही याद हैं बाकि जुमलों में बदल गए| बेशक बेरोज़गारी, स्वास्थ्य, गरीबी, शिक्षा में सुधार की कोशिस हुयी है लेकिन उससे ज्यादा नुकसान हुआ है सम्प्रदियक सौहार्द का| आशा करता हूँ आने वाले समय में सौहार्द को बनाये रखने की प्राथमिकता होगी|
    माफ़ कीजियेगा विस्तृत अवलोकन पेश नहीं क़र पाया, लेकिन अगला पोस्ट “आज़ादी और मेरे ख्याल” जरुर  पढियेगा|

    जय हिंद

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